प्रेरणा

रोज़ पढ़ने के लिए 10 प्रेरक संस्कृत सूक्ति — अर्थ सहित

हमारी परंपरा की 10 अमर सूक्तियाँ, उनके सरल अर्थ के साथ। रोज़ एक पढ़िए और दिन को दिशा दीजिए।

संस्कृत कला18 जून 20261 मिनट
प्रेरणाउद्यमेन हि सिध्यन्ति❀ संस्कृत कला
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कुछ शब्द सदियों से राह दिखाते आए हैं। ये दस संस्कृत सूक्तियाँ छोटी हैं, पर इनका अर्थ जीवनभर साथ देता है।

1.

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।

सुभाषित
काम परिश्रम से पूरे होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं।

2.

विद्या ददाति विनयं।

हितोपदेश
सच्ची विद्या विनम्रता देती है।

3.

सत्यमेव जयते।

मुण्डक उपनिषद्
अंत में सत्य की ही विजय होती है।

4.

योगः कर्मसु कौशलम्।

गीता · 2.50
कर्म को कुशलता से करना ही योग है।

5.

वसुधैव कुटुम्बकम्।

महा उपनिषद्
पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

6.

श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्।

गीता · 4.39
श्रद्धा रखने वाला ही ज्ञान पाता है।

7.

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।

कठ उपनिषद्
उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको मत।

8.

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।

गीता · 4.38
इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ नहीं।

9.

अहिंसा परमो धर्मः।

सुभाषित
अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।

10.

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।

अमृतबिन्दु उपनिषद्
मन ही मनुष्य के बंधन और मुक्ति दोनों का कारण है।

आज का अभ्यास

इनमें से एक सूक्ति चुनें और आज दिनभर जब भी याद आए, उसका अर्थ मन में दोहराएँ। यही छोटा अभ्यास सोच बदल देता है।

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