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गुरु पूर्णिमा 2026: महत्व, परंपरा और गुरु को समर्पित श्लोक

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है, इसका महत्व, और गुरु को समर्पित श्लोक। 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा पर इस पर्व को मनाने की सरल जानकारी।

संस्कृत कला9 जून 20261 मिनट
संस्कृतिगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः❀ संस्कृत कला
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गुरु पूर्णिमा हमारे जीवन में गुरु के स्थान को नमन करने का पर्व है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा (जून–जुलाई 2026) को मनाया जाता है।

तिथि

सही तारीख क्षेत्र और पंचांग के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है — अपने स्थानीय पंचांग से तिथि अवश्य मिला लें।

महत्व

इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म माना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत की रचना की। यह दिन हर उस गुरु के प्रति कृतज्ञता का है जिसने हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ाया।

गुरु को समर्पित श्लोक

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

गुरु वंदना

अर्थ — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं; गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं। ऐसे गुरु को मेरा नमन।

इस दिन क्या करें

  • अपने गुरु, शिक्षक या मार्गदर्शक का आभार व्यक्त करें।
  • कुछ समय पढ़ाई, ध्यान या स्वाध्याय को दें।
  • घर में एक श्लोक या पाठ का आयोजन करें।

गुरु केवल पढ़ाने वाला नहीं — राह दिखाने वाला हर व्यक्ति गुरु है। इस पूर्णिमा पर उन सबको नमन।

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