संस्कृति

कैलाश पर्वत कहाँ है? देश, ऊँचाई और पूरा परिचय

कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) में स्थित है और इसकी ऊँचाई 6,638 मीटर है। जानें यह किस देश में पड़ता है, चार धर्मों में महत्व, मानसरोवर, 52 किमी परिक्रमा और इसके रहस्य।

संस्कृत कला10 जुलाई 20263 मिनट
कैलाश पर्वत कहाँ है? देश, ऊँचाई और पूरा परिचय
शेयर करें:

कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) के नगरी प्रान्त में स्थित है, और इसकी ऊँचाई लगभग 6,638 मीटर (21,778 फुट) है। करोड़ों लोग इसे साक्षात भगवान शिव का धाम मानते हैं। नीचे विस्तार से जानें — यह किस देश में पड़ता है, चार धर्मों में इसका महत्व, मानसरोवर, परिक्रमा, और वे रहस्य जिनके कारण इसे आज तक कोई नहीं चढ़ पाया।

कैलाश पर्वत कहाँ है?

कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) के नगरी प्रान्त में, ट्रांस-हिमालय की गंगदीसे (कैलाश) पर्वतमाला में स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 6,638 मीटर (21,778 फुट) है। इसका आकार एक विशाल पिरामिड या हीरे जैसा है, और इसके चार मुख लगभग चारों दिशाओं की ओर हैं।

चार धर्मों का पवित्र पर्वत

कैलाश संसार का संभवतः एकमात्र पर्वत है जो एक साथ चार जीवित धर्मों में परम पूजनीय है:

  • हिंदू धर्म: भगवान शिव और माता पार्वती का निवास; इसे ब्रह्मांड का केंद्र (मेरु) भी माना जाता है।
  • बौद्ध धर्म: इसे देमचोक (चक्रसंवर) का स्थान माना जाता है।
  • जैन धर्म: माना जाता है कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने यहीं (अष्टापद) मोक्ष प्राप्त किया।
  • बोन धर्म: तिब्बत की प्राचीन बोन परंपरा में भी यह सर्वोच्च पवित्र पर्वत है।

चार महानदियों का उद्गम

कैलाश क्षेत्र को "एशिया की जल-मीनार" कहा जा सकता है। आसपास के लगभग 60 किमी के दायरे से चार बड़ी नदियों का उद्गम होता है — सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र (यारलुंग सांगपो) और करनाली (घाघरा, जो गंगा में मिलती है)

मानसरोवर और राक्षसताल

कैलाश के निकट दो झीलें हैं — पवित्र मानसरोवर, जिसे मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है, और उसके पास राक्षसताल। मानसरोवर में स्नान और परिक्रमा तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण भाग है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और परिक्रमा

हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाते हैं। पर्वत की परिक्रमा (कोरा) लगभग 52 किलोमीटर की होती है, जो सबसे ऊँचे डोल्मा-ला दर्रे (लगभग 5,600 मीटर) से होकर गुजरती है। माना जाता है कि एक परिक्रमा जीवन भर के पाप धो देती है।

यात्रा से पहले

कैलाश यात्रा अत्यधिक ऊँचाई और कठिन मौसम वाली है — उपयुक्त तैयारी, अनुमति (परमिट) और स्वास्थ्य-जाँच आवश्यक है। यात्रा से पहले किसी विश्वसनीय आयोजक और चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

वे रहस्य जिनसे कैलाश घिरा है

  • आज तक कोई शिखर पर नहीं चढ़ा: अनेक पर्वतारोहियों के बावजूद कैलाश की चोटी पर चढ़ाई का कोई प्रमाणित रिकॉर्ड नहीं है। 2001 में चीन ने यहाँ चढ़ाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। रेनहोल्ड मेसनर और सर एडमंड हिलेरी जैसे दिग्गजों ने भी इसकी धार्मिक पवित्रता के कारण चढ़ने से इनकार किया।
  • दिशाओं की ओर चार मुख: इसके चार फलक लगभग उत्तर-दक्षिण-पूर्व-पश्चिम की ओर हैं।
  • ॐ और स्वस्तिक की आकृति: दक्षिणी मुख पर ऊर्ध्वाधर दरार और आड़ी परतें मिलकर एक स्वस्तिक-सी आकृति बनाती हैं, जिसे भक्त शुभ मानते हैं।

ध्यान दें

कैलाश से जुड़ी कई बातें (जैसे तेज़ी से समय बीतना या दिशा-सूचक का भटकना) लोक-मान्यताएँ व अनुभव-कथाएँ हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं। श्रद्धा अपनी जगह, पर तथ्य और मान्यता का अंतर समझना अच्छा है।

शिव को समर्पित श्लोक

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

शिव ध्यान

अर्थ: कपूर के समान गौरवर्ण, करुणा के अवतार, संसार के सार, सर्पों की माला धारण करने वाले — माता भवानी सहित उन शिव को, जो सदा मेरे हृदय-कमल में निवास करते हैं, मैं नमन करता हूँ।

ॐ नमः शिवाय

पंचाक्षरी

कैलाश केवल एक पर्वत नहीं — यह आस्था, संयम और आत्म-खोज का प्रतीक है। इसकी ओर बढ़ता हर कदम मन को शिवमय कर देता है। हर हर महादेव।


चित्र: कैलाश पर्वत का उत्तरी मुख — छायाकार Ondřej Žváček, विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY 2.5)।

शेयर करें:
और संस्कृति

इसे भी पढ़ें