त्योहार · व्रत

गणतंत्र दिवस: सत्यमेव जयते का अर्थ व संस्कृत श्लोक

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है, राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' का पूरा श्लोक व अर्थ, अशोक चक्र का धर्म-अर्थ और देशभक्ति के संस्कृत श्लोक।

संस्कृत कला31 जुलाई 20263 मिनट
त्योहार · व्रतसत्यमेव जयते❀ संस्कृत कला
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गणतंत्र दिवस भारत के संविधान का पर्व है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत एक गणराज्य बना — अर्थात् ऐसा राष्ट्र जो अपने ही बनाए विधान से शासित हो।

और इसी दिन भारत ने अपना राष्ट्रीय आदर्श वाक्य भी अपनाया — जो एक उपनिषद् से आता है।

तिथि

गणतंत्र दिवस: प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी (2027 में मंगलवार)
26 जनवरी 1930 को 'पूर्ण स्वराज' की घोषणा हुई थी — उसी संकल्प के सम्मान में संविधान लागू करने के लिए यही तिथि चुनी गई।

सत्यमेव जयते — राष्ट्रीय आदर्श वाक्य

भारत के राजचिह्न (सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह-शीर्ष) के नीचे देवनागरी में अंकित है — सत्यमेव जयते। यह किसी नेता का नारा नहीं, बल्कि मुण्डक उपनिषद् का वाक्य है।

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्॥

मुण्डक उपनिषद् · 3.1.6

अर्थ: सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही देवयान (दिव्य मार्ग) प्रशस्त होता है — उसी पर चलकर निष्काम ऋषि सत्य के उस परम धाम तक पहुँचते हैं।

गहराई से देखिए

ध्यान दीजिए — राष्ट्र ने अपने आदर्श वाक्य के लिए न कोई युद्ध-घोष चुना, न कोई विजय-वचन। उसने चुना सत्य। यही भारतीय दृष्टि है: शक्ति का आधार सत्य है, और सत्य ही अंततः जीतता है।

राष्ट्रीय प्रतीकों में संस्कृत की जड़ें

प्रतीकसंस्कृत जड़भाव
राजचिह्नसत्यमेव जयते (मुण्डक उपनिषद्)सत्य की विजय
अशोक चक्रधर्मचक्र — 24 तीलियाँधर्म, गति, निरंतर प्रगति
राष्ट्रगीतवन्दे मातरम्मातृभूमि को वंदन
सत्य व अहिंसासत्यमेव जयते · अहिंसाराष्ट्र के नैतिक आधार

देशभक्ति के संस्कृत श्लोक

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

सुभाषित

अर्थ: माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

स्रोत पर एक ईमानदार टिप्पणी

यह पंक्ति वाल्मीकि रामायण की कुछ प्रतियों में मिलती है (एक रूप में इसे श्रीराम द्वारा लक्ष्मण से कहा बताया जाता है), परंतु सभी संस्करणों में यह नहीं है — इसलिए इसे प्रायः सुभाषित के रूप में उद्धृत किया जाता है। यह नेपाल का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य भी है।

वसुधैव कुटुम्बकम्।

महा उपनिषद् · 6

अर्थ: सारी पृथ्वी ही एक परिवार है — भारत की वह दृष्टि जो सीमाओं से भी आगे देखती है। पूरा अर्थ पढ़ें →

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

शांति मंत्र

अर्थ: सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों — किसी भी गणराज्य के लिए इससे सुंदर संकल्प क्या होगा।

गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस — भ्रम दूर कीजिए

स्वतंत्रता दिवसगणतंत्र दिवस
तिथि15 अगस्त 194726 जनवरी 1950
क्या हुआब्रिटिश शासन से आज़ादीसंविधान लागू, भारत गणराज्य बना
भावआज़ादी मिलीअपने विधान से शासन आरंभ
ध्वजारोहणप्रधानमंत्री, लाल किलाराष्ट्रपति, कर्तव्य पथ

इस दिन क्या करें

  • संविधान की प्रस्तावना एक बार पढ़ें — यह पाँच मिनट का काम है और दृष्टि बदल देता है।
  • बच्चों को बताएँ कि सत्यमेव जयते एक उपनिषद् से आया है।
  • एक संकल्प लें — कर्तव्य का, सत्य का, या स्वच्छता का।

जुड़े हुए लेख

सत्यमेव जयते। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🇮🇳

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है?

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य बना। यह तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' की घोषणा की थी — उसी संकल्प के सम्मान में यही दिन तय किया गया।

सत्यमेव जयते कहाँ से लिया गया है?

यह मुण्डक उपनिषद् (3.1.6) से लिया गया है। 26 जनवरी 1950 को राजचिह्न अपनाए जाने के साथ इसे भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य बनाया गया, और यह देवनागरी में राजचिह्न के नीचे अंकित है।

सत्यमेव जयते का पूरा श्लोक और अर्थ क्या है?

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्॥ — अर्थ: सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही देवयान मार्ग प्रशस्त होता है, जिस पर चलकर निष्काम ऋषि सत्य के परम धाम तक पहुँचते हैं।

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या अंतर है?

15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ — वह स्वतंत्रता दिवस है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होकर भारत गणराज्य बना — वह गणतंत्र दिवस है। एक आज़ादी का दिन है, दूसरा अपने संविधान से शासित होने का।

अशोक चक्र में 24 तीलियाँ क्यों हैं?

यह सारनाथ के अशोक स्तंभ का धर्मचक्र है। इसकी 24 तीलियाँ धर्म, गति और निरंतर प्रगति का प्रतीक मानी जाती हैं — यह सन्देश कि राष्ट्र कभी रुके नहीं, धर्म (न्याय) के मार्ग पर चलता रहे।

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