दशहरा 2026: कब है, विजय मुहूर्त, पूजा व कथा
दशहरा 2026 कब है — 20 अक्टूबर, मंगलवार। विजय मुहूर्त, शस्त्र व शमी पूजा की विधि, रावण दहन का समय, और राम-रावण व दुर्गा-महिषासुर दोनों कथाएँ — सरल हिंदी में।
नौ रातों की आराधना के बाद दसवाँ दिन — विजयादशमी। 2026 में दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। यह वर्ष के उन चुनिंदा दिनों में है जिन्हें अबूझ मुहूर्त कहा जाता है — यानी कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं।
तिथि व मुहूर्त
दशहरा 2026: मंगलवार, 20 अक्टूबर · आश्विन शुक्ल दशमी
विजय मुहूर्त: लगभग दोपहर 2:00 – 2:46 बजे (नई दिल्ली)
नवरात्रि: 11–19 अक्टूबर · महाअष्टमी: 18 अक्टूबर · महानवमी: 19 अक्टूबर
मुहूर्त का समय सूर्योदय पर निर्भर है और शहर के अनुसार बदलता है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
दो कथाएँ, एक ही भाव
दशहरे की खूबी यह है कि इसे भारत के अलग-अलग भागों में अलग कारणों से मनाया जाता है — और दोनों कथाओं का सन्देश एक ही है।
1. श्रीराम की विजय — उत्तर व पश्चिम भारत
रामायण के अनुसार माता सीता के हरण के बाद श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की और इसी दिन रावण का वध किया। रावण विद्वान था, शिव-भक्त था, पर उसका अहंकार उसे ले डूबा। इसीलिए रावण-दहन केवल एक पुतला जलाना नहीं — अपने भीतर के अहंकार को जलाने का प्रतीक है।
2. माँ दुर्गा की विजय — बंगाल, ओडिशा, असम
देवी भागवत के अनुसार महिषासुर नामक असुर को यह वरदान था कि उसे कोई पुरुष नहीं मार सकता। तब सभी देवताओं की सम्मिलित शक्ति से माँ दुर्गा प्रकट हुईं और नौ दिनों के युद्ध के बाद दसवें दिन उन्होंने महिषासुर का वध किया — इसीलिए वे महिषासुरमर्दिनी कहलाईं।
एक ही सन्देश
चाहे राम हों या दुर्गा — कथा यही कहती है कि अधर्म कितना भी बलशाली दिखे, टिकता नहीं। और विजय अकेले नहीं मिलती: राम को वानरों का साथ चाहिए था, दुर्गा को समस्त देवताओं की शक्ति।
विजय मुहूर्त — इसका महत्व क्या है?
दिन के काल-विभाजन में विजय मुहूर्त वह समय है जिसे किसी भी नए आरंभ के लिए सर्वाधिक शुभ माना गया है। मान्यता है कि श्रीराम ने लंका-प्रस्थान इसी मुहूर्त में किया था — इसीलिए नाम "विजय"।
इस काल में परंपरागत रूप से किया जाता है:
- शस्त्र पूजा — सैनिक, पुलिस और शिल्पकार अपने उपकरणों की पूजा करते हैं
- वाहन व यंत्र पूजा — नई गाड़ी या मशीन का पूजन
- विद्यारंभ — बच्चों का अक्षर-आरंभ
- नए कार्य का शुभारंभ — व्यापार, दुकान, गृह-प्रवेश
शमी पूजा — पांडवों की परंपरा
महाभारत की कथा है कि अज्ञातवास पर जाने से पूर्व पांडवों ने अपने शस्त्र शमी वृक्ष की खोह में छिपा दिए थे। वर्ष पूरा होने पर, विजयादशमी के दिन ही उन्होंने वे शस्त्र वापस लिए और विजय प्राप्त की।
इसीलिए आज भी इस दिन शमी वृक्ष की पूजा होती है और लोग एक-दूसरे को शमी-पत्र देकर शुभकामनाएँ देते हैं। महाराष्ट्र में इसे "सोनं" (सोना) कहकर बाँटा जाता है।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के स्वच्छ स्थान पर अष्टदल कमल बनाकर भगवान राम या माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।
- अपराजिता देवी का पूजन करें — विजयादशमी पर इनकी पूजा की विशेष परंपरा है।
- शस्त्र, वाहन, पुस्तक या औज़ार — जो आपकी आजीविका का साधन हो — उसका पूजन करें।
- शमी वृक्ष की पूजा करें या शमी-पत्र अर्पित करें।
- विजय मुहूर्त में नए कार्य का संकल्प लें।
- संध्या को रावण दहन देखें और परिवार संग शुभकामनाएँ बाँटें।
अपराजिताय नमः।
शिवायै शान्तायै जयायै विजयायै नमो नमः॥
भाव: जो कभी पराजित नहीं होतीं, उन देवी को नमन — कल्याणी, शांत, जयशील और विजय देने वाली देवी को बारंबार प्रणाम।
दशहरा से दिवाली — बीस दिन की यात्रा
| पर्व | 2026 में | क्या हुआ |
|---|---|---|
| विजयादशमी | 20 अक्टूबर | रावण-वध, लंका विजय |
| धनतेरस | 6 नवंबर | दिवाली-पर्व का आरंभ |
| दिवाली | 8 नवंबर | श्रीराम की अयोध्या-वापसी |
रावण-वध के लगभग बीस दिन बाद श्रीराम अयोध्या लौटे — और नगरवासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया। इसीलिए दशहरा और दिवाली एक ही कथा के दो पड़ाव हैं।
रावण दहन — असली अर्थ
हर वर्ष पुतला जलता है, पर प्रश्न वही रहता है — जलाना किसे है?
रावण के दस सिर दस विकारों के प्रतीक माने जाते हैं: काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य, अहंकार, जड़ता, हिंसा और छल। परंपरा कहती है कि इनमें से एक भी विकार यदि इस वर्ष कम हुआ, तो दहन सार्थक हुआ।
एक छोटा सुझाव
इस दशहरे पर परिवार के साथ बैठकर हर सदस्य एक एक विकार चुने जिसे वह इस वर्ष कम करना चाहता है। पुतला तो जल ही जाएगा — यह संकल्प वर्षभर साथ चलेगा।
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विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। असत्य पर सत्य की विजय हो। 🏹
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशहरा 2026 में कब है?
दशहरा (विजयादशमी) 2026 में मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। यह आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है — शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के समापन पर दसवाँ दिन।
विजय मुहूर्त क्या है और कब रहता है?
विजय मुहूर्त दिन का वह काल है जिसे किसी भी नए कार्य के आरंभ के लिए सर्वाधिक शुभ माना जाता है — मान्यता है कि श्रीराम ने इसी मुहूर्त में लंका पर प्रस्थान किया था। 2026 में यह लगभग दोपहर 2:00 से 2:46 बजे तक बताया गया है (नई दिल्ली); समय शहर के अनुसार बदलता है, अपने पंचांग से पुष्टि करें।
दशहरा क्यों मनाया जाता है — राम की विजय या दुर्गा की?
दोनों। उत्तर व पश्चिम भारत में यह दिन श्रीराम द्वारा रावण-वध का स्मरण है, तो बंगाल, ओडिशा व असम में माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर-वध का। भाव एक ही है — असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय।
शमी पूजा क्यों की जाती है?
महाभारत के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास से पूर्व अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे और विजयादशमी को वापस लिए। इसीलिए इस दिन शमी वृक्ष की पूजा और शमी-पत्र का आदान-प्रदान शुभ माना जाता है।
दशहरे पर कौन से नए काम शुरू करना शुभ है?
विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है — नया व्यापार, वाहन या संपत्ति की खरीद, गृह-प्रवेश, विद्यारंभ और शस्त्र पूजा सब शुभ माने जाते हैं। बच्चों का अक्षर-आरंभ भी परंपरा में इसी दिन कराया जाता है।
दशहरा और दिवाली में कितने दिन का अंतर होता है?
परंपरा के अनुसार लगभग बीस दिन। विजयादशमी पर रावण-वध हुआ, और उसके बीस दिन बाद श्रीराम अयोध्या लौटे — वही दिन दिवाली है। 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर और दिवाली 8 नवंबर को है।
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