श्लोक

गीता के श्लोक — किस समस्या के लिए कौन सा

डर, तनाव, क्रोध, शोक, असफलता या निर्णय — हर समस्या के लिए गीता का कौन सा श्लोक पढ़ें? 14 स्थितियों की सूची, श्लोक और सरल अर्थ के साथ एक ही पेज पर।

संस्कृत कला23 अगस्त 20263 मिनट
श्लोकसमत्वं योग उच्यते❀ संस्कृत कला
शेयर करें:

गीता कोई एक उत्तर नहीं देती — वह हर स्थिति के लिए एक दृष्टि देती है। नीचे 14 सामान्य समस्याएँ और उनके लिए सबसे उपयुक्त श्लोक, एक ही जगह।

इसे कैसे पढ़ें

अपनी आज की स्थिति सूची में खोजिए, फिर उस श्लोक को धीरे-धीरे तीन बार पढ़िए — पहली बार शब्द, दूसरी बार अर्थ, तीसरी बार मौन। जिन विषयों पर विस्तृत लेख उपलब्ध है, उनका लिंक साथ दिया गया है।

समस्या के अनुसार श्लोक — पूरी सूची

स्थितिश्लोकगीता
डर, घबराहटसर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज18.66
तनाव, चिंताकर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन2.47
क्रोधक्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः2.63
शोक, किसी अपने का जानादेहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा2.13
मृत्यु का भयन जायते म्रियते वा कदाचित्2.20
निर्णय न ले पानायच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे2.7
असफलतासिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते2.48
मन का चंचल होनाअभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते6.35
आत्म-संदेहउद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्6.5
दूसरों से तुलनाश्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्3.35
लोभ, आसक्तिध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते2.62
अहंकारअहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते3.27
अन्याय देखकरयदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत4.7
सबके कल्याण की भावनासर्वभूतहिते रताः12.4

विस्तार से पढ़ें

इन स्थितियों पर पूरे लेख — श्लोक, अर्थ और व्यावहारिक उपयोग के साथ:

तीन श्लोक जो हर स्थिति में काम आते हैं

यदि केवल तीन याद रखने हों, तो ये तीन —

1. कर्म पर अधिकार, फल पर नहीं

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

गीता · 2.47

अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। न तुम फल के कारण बनो, न तुम्हारी आसक्ति कर्म न करने में हो।

2. सफलता-असफलता में समान रहो

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

गीता · 2.48

अर्थ: आसक्ति छोड़कर, सिद्धि और असिद्धि में समान भाव रखते हुए कर्म करो — इसी समत्व को योग कहते हैं।

3. स्वयं को स्वयं उठाओ

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥

गीता · 6.5

अर्थ: मनुष्य स्वयं ही अपना उद्धार करे, स्वयं को गिराए नहीं। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु।

रोज़ का अभ्यास

गीता का दूसरा अध्याय पूरी गीता का सार है। रोज़ उसका एक श्लोक पढ़िए — 72 दिन में पूरा अध्याय हो जाएगा, और गीता का मूल आपके भीतर बैठ जाएगा।

अपनी स्थिति लिखिए, श्लोक पाइए

यदि आपकी स्थिति ऊपर की सूची में नहीं है, तो अपनी बात अपने शब्दों में लिखिए — हमारा श्लोक फाइंडर उससे जुड़ा श्लोक अर्थ सहित खोज देता है।

यह सूची PDF में सहेजें

पूरी सूची — 14 स्थितियाँ और तीनों मुख्य श्लोक अर्थ सहित — एक PDF में सहेज लें या प्रिंट कर लें।

प्रिंट विंडो में “Save as PDF” चुनें।

जुड़े हुए लेख

एक ईमानदार बात

श्लोक परिस्थिति नहीं बदलते — वे उसे देखने की दृष्टि बदलते हैं। व्यावहारिक समस्या के लिए व्यावहारिक कदम भी आवश्यक हैं, और स्वास्थ्य या मन से जुड़ी गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सहायता अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता का कौन सा श्लोक किस समस्या के लिए है?

डर के लिए 2.20 और 18.66, तनाव के लिए 2.47, क्रोध के लिए 2.62-63, शोक के लिए 2.13 और 2.27, मृत्यु-भय के लिए 2.20 और 2.22, तथा निर्णय न ले पाने पर 2.7 और 3.35 सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। पूरी सूची इस लेख में दी गई है।

रोज़ एक श्लोक पढ़ना हो तो कहाँ से शुरू करें?

दूसरे अध्याय से। गीता का दूसरा अध्याय (सांख्य योग) पूरी गीता का सार है — इसमें आत्मा, कर्तव्य और समत्व तीनों आ जाते हैं। रोज़ एक श्लोक पढ़ें, उसका अर्थ समझें, और दिनभर उसे मन में रखें।

गीता का सबसे शक्तिशाली श्लोक कौन सा है?

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन (2.47) सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला श्लोक है। पर 'सबसे शक्तिशाली' व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर है — शोक में 2.13 अधिक सहारा देता है, और भय में 18.66।

क्या श्लोक पढ़ने से समस्या हल हो जाती है?

श्लोक परिस्थिति नहीं बदलते — वे उसे देखने की दृष्टि बदलते हैं। यही गीता का मूल है। व्यावहारिक समस्याओं के लिए व्यावहारिक कदम भी आवश्यक हैं, और स्वास्थ्य या मन से जुड़ी गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सहायता अवश्य लें।

गीता में कुल कितने श्लोक हैं?

भगवद्गीता में 18 अध्याय और सामान्यतः 700 श्लोक माने जाते हैं। कुछ संस्करणों में संख्या में थोड़ा अंतर मिलता है।

शेयर करें:
और श्लोक

इसे भी पढ़ें

श्लोकन जायते म्रियते वान हन्यते हन्यमाने शरीरे❀ संस्कृत कला
श्लोक

मृत्यु के भय पर गीता के 5 श्लोक — अर्थ सहित

मृत्यु का भय क्यों होता है और गीता क्या उत्तर देती है? आत्मा की अमरता बताने वाले 5 प्रसिद्ध श्लोक — न जायते म्रियते वा से वासांसि जीर्णानि तक, अर्थ सहित।

23 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
श्लोकअव्यक्तादीनि भूतानितत्र का परिदेवना❀ संस्कृत कला
श्लोक

दुख और शोक में गीता के 5 श्लोक — अर्थ सहित

किसी अपने को खोने का दुख हो तो गीता क्या कहती है? शोक में सहारा देने वाले 5 श्लोक — अशोच्यान् से अव्यक्तादीनि तक, सरल अर्थ और कठिन समय में उनका उपयोग सहित।

23 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
श्लोकडमड्डमड्डमड्डमन्चण्डताण्डवं❀ संस्कृत कला
श्लोक

शिव तांडव स्तोत्र: अर्थ सहित (रावण रचित स्तुति)

शिव तांडव स्तोत्र के आरंभिक 4 श्लोक, मूल संस्कृत व सरल हिंदी अर्थ सहित। जानिए रावण ने इसे क्यों रचा, इसकी डमरू-जैसी लय का रहस्य और पाठ की सही विधि।

28 जुलाई 20264 मिनट पढ़ें